(पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग)

स्वच्छ भारत मिशन के बारे में

सरकार ने 1986 में केन्द्रीय ग्रामीण स्वच्छता कार्यक्रम शुरू किया। इसका प्राथमिक उददेश्य ग्रामीण लोगों के जीवन स्तर को सुधारना और महिलाओं को निजात तथा प्रतिष्ठा प्रदान करना था। गरीबी रेखा से नीचे के परिवारों द्वारा निजी पारिवारिक शौचालय बनावाए जाने और उसका इस्तेमाल किये जाने की उनकी उपलबिधयों को मान्यता देने के लिए उन्हें वित्तीय प्रोत्साहन दिये गये। ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन के तहत क्रियाकलाप शुरू करने के अलावा विद्यालय शौचालय इकाइयों, आगनवाड़ी शौचालय और सामुदायिक स्वच्छता परिसरों के निर्माण के लिए भी सहायता का विस्तार किया गया।

स्वच्छ भारत अभियान को स्वच्छ भारत मिशन और स्वच्छता अभियान भी कहा जाता है| यह एक राष्ट्रीय स्तर का अभियान है और भारत सरकार द्वारा चलायी जा रही है जो की शहरों और गाओं की सफाई के लिए आरम्भ की गयी है| इस अभियान में शौचालयों का निर्माण, ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता कार्यक्रमों को बढ़ावा देना, गलियों व सड़कों की सफाई, देश के बुनियादी ढांचे को बदलना आदि शामिल है। इस अभियान को आधिकारिक तौर पर राजघाट, नई दिल्ली में 2 अक्टूबर 2014 को महात्मा गांधी की 145 वीं जयंती पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू किया गया था।

इतिहासः

इस केंद्रीय की स्थापना मार्च] 2003 में पर्यावरण एवं वन मंत्रालय अधिनियम के माध्यम से ई.एन.वी.आई.एस.-सी.ई.पी. (क्षमता संवर्धन कार्यक्रम) के अंतर्गत सुलभ इंट्टनेशनल सेवा संगठन में एच.एस.ई.एस. के क्षेत्र में नवीनतम शोध से संबंधित आंकड़ों/सूचनाओं के संकलन, कार्रवाई करने, विश्लेषण और प्रचार-प्रसार करने के लिए की गई है। यह केंद्र एक वेबसाइट तैयार करेगा और सभी संबंधित कार्मिकों/संस्थानों तक व्यापक प्रचार-प्रसार के लिए संदर्भित विषय क्षेत्र के बारे में प्रासंगिक आंकड़े उपलब्ध कराएगा।

मुख्य उददेश्य

सरकारी, शिक्षा जगत, व्यापार और ईएनवीआईएस सहित गैर सरकारी संगठनों के सूचना प्रयोगकर्ताओं, वाहकों और प्रदात्ताओं के साथ संपर्क स्थापित करना। ..

  • ग्रामीण क्षेत्रों में सामान्य जीवन स्तर में सुधार करना।
  • देश में सभी ग्राम पंचायतों द्वारा निर्मल सिथति प्राप्त करने के साथ 2019 तक स्वच्छ भारत मिशन के लक्ष्य को हासिल करने के लिए स्वच्छता कवरेज में तेजी लाना।
  • जागरूकता सृजन और स्वास्थ्य शिक्षा के माध्यम से स्थायी स्वच्छता सुविधाओं को बढ़ावा देने वाले समुदायों और पंचायती राज संस्थाओं को प्रोत्साहित करना।
  • पारिसिथतिकीय रूप से सुरक्षित और स्थायी स्वच्छता के लिए किफायती तथा उपयुक्त प्रौधोगिकियों को बढ़ावा देना।
  • ग्रामीण क्षेत्रों में संपूर्ण स्वच्छता के लिए ठोस और तरल अपशिष्ट प्रबंधन पर विशेष ध्यान देते हुए, समुदाय प्रबंधित पर्यावरणीय स्वच्छता पद्धति विकसित करना।